सभी धनों में श्रेष्ठ जिसे चोर भी नहीं चुरा सकता ~ सुभाषित संस्कृत श्लोक 08




न चोराहार्यम् न च राजहार्यम्, न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि। 


व्यये कृते वर्धत एव नित्यं, विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥




सुभाषित संस्कृत श्लोक 08 का भावार्थ:

जिसे चोर नहीं चुरा सकता हैं, ना राजा हरण कर सकता है, ना ही भाई बँट सकते हैं, और जिसमे कोई भार भी नहीं होता है, जो नित्य खर्च करने पर और भी बढ़ता है, ऐसी विद्या धन सभी धनों में श्रस्ठ है।




English Translation Of Subhashitani Shloka 08:

It cannot be stolen by thieves, nor can it be taken away by the kings. It cannot be divided among brothers, it does not have a weight. If spent regularly, it always keeps growing. The wealth of knowledge is the most superior wealth of all!





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