जानिए मरते वक़्त रावण ने लक्ष्मण को क्या शिक्षा दी

Teachings that Ravana gave to Laxman on his deathbed in Hindi

राम-रावण का घोर यद्ध समाप्त होआ | रावण मरणासन्न अवस्था में था, भगवान श्रीराम ने उसका अंतिम समय जान के लक्ष्मण से कहा -'जाओ ! इस संसार से नीति, राजनीति और शक्ति का महान् पंडित विदा ले रहा है, तुम उसके पास जाओ और उससे जीवन की कुछ ऐसी शिक्षा ले लो जो और कोई नहीं दे सकता। श्रीराम की बात मानकर लक्ष्मण मरणासन्न अवस्था में पड़े रावण पास गये और उसके सिर के नजदीक जाकर खड़े हो गए।


रावण ने कुछ नहीं कहा। लक्ष्मणजी वापस रामजी के पास लौटकर आए। तब भगवान ने कहा कि यदि किसी से ज्ञान प्राप्त करना हो तो उसके चरणों के पास खड़े होना चाहिए न कि सिर की ओर। यह बात सुनकर लक्ष्मण जाकर इस रावण के पैरों की ओर खड़े हो गए। अब लक्ष्मण के आचरण से संतुस्ट रावण ने उन्हें निति की शिक्षा दी | और कहा 'लक्ष्मण! मै अपने जीवन में चार काम करना चाहता था - 

1- मै
1. लंका के आस पास के सौ योजन समुद्र मीठा कर दू ,
2. सोने की लंका को सुगन्धित कर दू,
3. स्वर्ग के लिए सीढ़िया बनवा दू,
4. मृत्यु को वश में कर लू |
मै ये चारो काम कर सकता था| पर इन्हे छोटा समझ कर टालता रहा| आज मै मन के अरमान मन में ही रख कर जा रहा हु | उपेछा, टालना, किसी काम को छोटा मान लेना, सबसे बड़ी भूल है| मुझे अपनी इस बात पर दुःख हैं | तुम यह गलती मत करना|


2- दूसरी बात जो रावण ने लक्ष्मण को बताई वह ये थी कि शुभ कार्य जितनी जल्दी हो कर डालना और अशुभ को जितना टाल सकते हो टाल देना चाहिए यानी " शुभस्य शीघ्रम् "। मैंने श्रीराम को पहचान नहीं सका और उनकी शरण में आने में देरी कर दी, इसी कारण मेरी यह हालत हुई।


3- तीसरी बात यह कि अपने प्रतिद्वंद्वी, अपने शत्रु को कभी अपने से छोटा नहीं समझना चाहिए, मैं यह भूल कर गया। मैंने जिन्हें साधारण वानर और भालू समझा उन्होंने मेरी पूरी सेना को नष्ट कर दिया। मैंने जब ब्रह्माजी से अमरता का वरदान मांगा था तब मनुष्य और वानर के अतिरिक्त कोई मेरा वध न कर सके ऐसा कहा था क्योंकि मैं मनुष्य और वानर को तुच्छ समझता था। मेरी मेरी गलती हुई।


4- रावण ने लक्ष्मण को अंतिम बात ये बताई कि अपने जीवन का कोई राज हो तो उसे किसी को भी नहीं बताना चाहिए। यहां भी मैं चूक गया क्योंकि विभीषण मेरी मृत्यु का राज जानता था। ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।




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