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2 टिप्पणियाँ:

  1. खिले हुए फूल
    ‘खिले हुए फूल’ सभी के मनमोहक होता है,यह स्नेह,दोस्ती और प्रेम का प्रतिक माना जाता है | वैसे जब भी हम प्रेम का नाम सुनते है तो मन रोमांचित हो उठता है,बिना हवा के सभी चीज़ उड़ने लगता और हम कल्पना की दुनिया में सैर करने लगता है | क्योंकि प्रेम शब्द ही ऐसा है जो दो दिलो को एक कर देता है |ऐसा नहीं की सभी लोग ‘खिले हुए फूल’ को देखकर प्रसन्न होते है | दिल टुटा आशिक ऐसे फूल को देखकर नफरत ही करते/करती है,क्योंकि तथाकथित प्रेमिका/प्रेमी इस फूल के कारण ही दूर चला गया/चली गयी है |
    एक व्यक्ति इस ‘खिले हुए फूल’ इतना मोहित हो गया और सोचा, क्यों न एक बगीचा लगाया जाए | अपने संकल्प को कुछ ही महीनों में पूरा कर लिया,परिणाम स्वरुप बगीचे में तितली के विभिन्न प्रजाति आने लगी | समाज में मनमोहक वातावरण छा गया और सभी तरफ उस व्यक्ति ( अब माली ) की चर्चा होने लगा | इनको देखकर कई लोग अपने घर के आस-पास बगीचे लगाने की सोचे और लगाए भी | उसी बगीचा को देखकर एक दूसरा आदमी भी बगीचा लगाया लेकिन उनके पास बगीचा सभालने का कौशल नहीं था परिणाम स्वरुप बगीचा बिखर गया है | प्रथम माली जो इस करवा को शुरू किया था उसपर नज़र प्रान्त के राजा का भी था | वह राजा बगीचे में घूमना चाहता था राजा अपने ईच्छा के अनुरूप बगीचा घुमा भी और प्रशंसा भी किया | माली अब सबको कहता मेरे संबंध राजा से है और धीरे- धीरे अहंकार के शिखर पर पहुच गया | अब फूलो में खोट निकालने लगे है, अपने ईच्छा के अनुरूप किसी भी ‘खिले हुए फूल’ को गाली देता,तोड़ता और फेक देता है | वह भूल गया कि सूखे-मुड़झाए फूल से ही फूलों का बिज़ बनता है,जिससे कई पेड़ का जन्म होगा और फूल भी आएगा जिससे बगीचों का सौन्दर्य वापस आएगा एवं इसी फूल से लाखों- करोड़ो बगीचा बन सकेगा और धरती पर स्वर्ग का अवतरण हो सकेगा ! माली को याद दिलाने का गुस्ताखी करें,कौन ?

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  2. हमें आप की यह कविता बहुत अच्छी लगी किन्तु यह एक अधूरी कविता है अगर आप इसे पूरा कर के हमें send करे तो हम इसे आप के नाम के साथ publish करेंगे|

    er.anildwivedi@gmail.com... send करिए

    जवाब देंहटाएं

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